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कुलजीत सिंह चहल ने माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में वर्षा जल संचयन की श्रेष्ठतम प्रणालियों का अध्ययन करने हेतु सूरत, गुजरात का दौरा किया

"विकसित भारत - विकसित NDMC" की दिशा में NDMC की योजना, सूरत के सफल और प्रभावशाली मॉडल के अनुरूप तैयार की जाएगी

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Tour And Travels
  • कुलजीत सिंह चहल ने बेहतर नागरिक सेवाओं के लिए तकनीक के एकीकृत उपयोग हेतु सूरत के ICCC मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया

 

नई दिल्ली, 05 अप्रैल, 2025.

“जल हमारे जीवन का सबसे ज़रूरी प्राकृतिक संसाधन है और इसका संरक्षण पर्यावरण, शहरों की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद ज़रूरी है, ” यह बात नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के उपाध्यक्ष श्री कुलजीत  सिंह चहल ने अपने आज सूरत, गुजरात दौरा के दौरान कही । इस दौरे में परिषद के OSD(रेवेन्यू मैनेजमेंट), श्री सी अरविंद और चीफ इंजीनियर श्री एच.पी. सिंह भी उनके साथ थे l इस दौरे का मकसद था सूरत में अपनाई गई रेन वाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन), बाढ़ नियंत्रण और जल संरक्षण की नई तकनीकों को सीधे देखना और समझना है। उन्होंने कहा कि ये सभी पहलें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और माननीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल जी के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक लागू की गई हैं।

इस सुरर दौरे की शुरुआत श्री चहल और माननीय मंत्री श्री सी.आर. पाटिल जी की मुलाकात से हुई । इस दौरान श्री चहल ने मंत्री जी को जानकारी दी कि NDMC ने परिषद क्षेत्र में 272 पुराने रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स का री-डेवलपमेंट शुरू कर दिया है और 101 नए पिट्स बनाए जा रहे हैं। यह काम NDMC क्षेत्र में मानसून के दौरान zero water logging (जलभराव ना होने) और groundwater recharge (भूजल स्तर बढ़ाने) के उद्देश्य से किया जा रहा है, जो माननीय प्रधानमंत्री जी की सोच के अनुरूप है।

श्री चहल ने बताया कि इससे पहले 18 मार्च 2025 को दिल्ली में जल शक्ति मंत्रालय में एक हाई-लेवल मीटिंग हुई थी, जिसमें NDMC चेयरमैन, जल आयोग (CWC), नेशनल वॉटर मिशन (NWM), CGWB और NDMC के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। उस बैठक में NDMC ने दिल्ली में ड्रेनेज सुधार और जलभराव से निपटने के प्लान की एक डिटेल प्रेजेंटेशन दी थी। उसी बैठक के बाद सूरत का यह स्टडी टूर तय किया गया ताकि देश के सबसे सफल urban water management मॉडल को देखा और समझा जा सके।

आज सूरत दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सूरत के Integrated Command and Control Centre (ICCC) में एक प्रेजेंटेशन में हिस्सा लिया, जिसे हाइड्रोलिक, ड्रेनेज और टर्शरी ट्रीटमेंट डिपार्टमेंट के इंजीनियरों ने दिया। श्री चहल ने इस सेंटर की सराहना की और इसे smart city planning और sustainable development का बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने खासकर इसमें अपनाए गए 3R principles—Reduce (कम करना), Reuse (फिर से इस्तेमाल), और Recycle (पुनर्चक्रण)—की तारीफ की।

श्री कुलजीत सिंह चहल ने सूरत के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) की जानकारी देते हुए बताया कि यह केंद्र वर्ष 2016 में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करना था। यह अत्याधुनिक केंद्र बीआरटीएस, ट्रैफिक प्रबंधन, आपातकालीन सेवाएं, सीसीटीवी निगरानी, स्ट्रीट लाइट मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण सहित 30 से अधिक नगर सेवाओं के डेटा को एक एकीकृत प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है। यह सेंटर रियल-टाइम मॉनिटरिंग, डेटा आधारित निर्णय लेने, संसाधनों के कुशल उपयोग और शहरी चुनौतियों के प्रति सक्रिय प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है। इसकी मजबूत आईटी संरचना जल आपूर्ति, परिवहन, स्वास्थ्य, ड्रेनेज और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे अहम विभागों से वास्तविक समय में डेटा एकत्र कर उसका विश्लेषण करती है, जिससे प्रभावी शहरी प्रशासन और नागरिक केंद्रित सेवा वितरण सुनिश्चित होता है। नागरिकों को मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया, वेरिएबल मैसेज साइन्स जैसी डिजिटल सुविधाओं के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे यह सेंटर स्मार्ट और प्रतिक्रियाशील शहरी प्रबंधन का एक केंद्रीय बिंदु बन गया है।

श्री चहल ने बताया कि वर्तमान में एनडीएमसी के आईसीसीसी में कई महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल नहीं हैं जो सूरत में सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। उन्होंने एनडीएमसी के आईसीसीसी को सूरत मॉडल के अनुसार उन्नत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि नई दिल्ली देश की राजधानी के केंद्र में स्थित है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं, इसलिए एक अत्याधुनिक कमांड सेंटर आपात स्थितियों जैसे तेज हवाएं, भारी बारिश या जलभराव के दौरान त्वरित और प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आश्वस्त किया कि एनडीएमसी प्रणाली में सूरत आईसीसीसी की सफल विशेषताओं को शामिल करने के लिए एक ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे आपदा प्रबंधन और शहरी लचीलापन को सुदृढ़ किया जा सके।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एनडीएमसी को ट्रैफिक पुलिस और आपदा प्रबंधन इकाइयों जैसे अन्य प्रमुख निकायों को भी आईसीसीसी से जोड़ना चाहिए, जिससे एक पूर्णतः एकीकृत और उत्तरदायी नगर प्रशासन प्रणाली का निर्माण हो सके, जो नागरिकों और आगंतुकों दोनों को विश्वस्तरीय सेवाएं प्रदान कर सके।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने बामरोली स्थित Tertiary Treatment Plant, Bio-Diversity Park में ग्राउंड वाटर रिचार्ज सिस्टम, G.D. Goenka Canal Corridor और Flood Protection Wall जैसे कई अहम स्थानों का दौरा किया। श्री चहल ने बताया कि ये सभी जगहें शहरी बाढ़, भूजल की कमी और पर्यावरण सुधार के लिए किए गए इनोवेटिव प्रयासों का शानदार उदाहरण हैं। खास तौर पर बायोडायवर्सिटी पार्क, जो पहले कचरे का डंपिंग ग्राउंड था, अब Smart City Mission के तहत एक हरित और सुंदर स्थल में बदल चुका है – ये सच में waste to wealth की मिसाल है।

श्री चहल ने इन क्षेत्रों के समग्र शहरी जल प्रबंधन को प्रदर्शित करने में महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “ये स्थल नवाचार, स्थिरता और दूरदृष्टि के समन्वय का प्रतीक हैं। सूरत ने जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं, वे वास्तव में प्रशंसनीय हैं और अन्य शहरी क्षेत्रों के लिए एक मार्गदर्शक मॉडल प्रस्तुत करती हैं।”

अपनी सराहना व्यक्त करते हुए श्री चहल ने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व और माननीय मंत्री श्री सी.आर. पाटिल जी के समर्पित प्रयासों के तहत सूरत ने विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। एनडीएमसी की टीम यहां से सीखी गई सर्वोत्तम प्रथाओं को निश्चित रूप से लागू करेगी, जिससे नई दिल्ली में जल संरक्षण और शहरी लचीलापन को मजबूती मिलेगी।” श्री चहल ने माननीय मंत्री जी का धन्यवाद दिया और कहा आने वाले दिनों में हम उनसे और भी सीखेंगे l

श्री चहल ने आगे कहा कि विकसित भारत@2047 की दृष्टि के तहत एनडीएमसी आने वाले 100 वर्षों के लिए एक दीर्घकालिक योजना तैयार करेगा। ‘विकसित एनडीएमसी’ की संकल्पना सूरत के प्रभावी और सफल मॉडल के अनुरूप तैयार की जाएगी, जिससे टिकाऊ, स्मार्ट और भविष्य के लिए तैयार शहरी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

श्री चहल ने कहा, “आज सूरत के दौरे के बाद वास्तव में यह महसूस हुआ कि गुजरात के सूरत में कितना अद्भुत विकास हुआ है—जो काबिले तारीफ है। सूरत मॉडल को देखते हुए मैं सुझाव दूंगा कि एनडीएमसी को भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कार्य करना चाहिए। हमें बाहरी स्रोतों से पानी खरीदने की बजाय अपने सिस्टम के भीतर जल का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) पर ध्यान देना चाहिए। एनडीएमसी को अपने आंतरिक संसाधनों का कुशलता से उपयोग करना चाहिए और साथ ही सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए ताकि यह एक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार नगरपालिका क्षेत्र बन सके।”

उन्होंने कहा, “NDMC पूरी तरह से तैयार है कि जो सफल मॉडल हमने सूरत में देखे हैं उन्हें अपनाकर नई दिल्ली को water-secure और waterlogging-free बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। सूरत की यात्रा न केवल प्रेरणादायक रही बल्कि हर उस शहर के लिए एक सीख है जो टेक्नोलॉजी, प्लानिंग और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना चाहता है।”